मुझे घनी छाव अदा करने को , खुद कड़ी धूप में चलते उन्हें मैंने देखा है ।
मुझे शीत हवा से बचाने को, ठंड में ठिठुरता उन्हें मैंने देखा है ।
मुझे पढाने को, रातों में जगता उन्हे मैनें देखा है ।
मुझे आईसकृीम खिलाने को, दो रोटी कम खाता उन्हें मैंने देखा है ।
मेरी गलतीयों पर मुझे डांट कर, खुद उदास होता, उन्हें मैंने देखा है ।
मेरी चोट पर दवा लगाते , सिसकता उन्हें मैंने देखा हैं ।
मुझे मेरी कमिया बता कर, दूसरो से मेरी पृशंसा करते उन्हें मैंने देखा हैं।
खुद की ज़रूरते काट कर, मुझे रईसी कराते, उन्हें मैंने देखा हैं ।
खुद का मन मारकर, मेरी ज़िद पूरी करते उन्हें मैंने देखा हैं ।
मुझे बड़ा करते करते उन्हें बूढ़ा होते, मैंने देखा हैं
।
लोग कहते हैं, भगवान केवल मन में दिखते हैं ।
मगर , धरती पर भगवान मैंने देखा हैं ।
